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दीवाली के दिन माता लक्ष्मी और गणेश का पूजन क्यों किया जाता है? जाने इसका दार्शनिक दृष्टिकोण

दीवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? धन संपदा के साथ बुद्धि और विवेक का महत्व क्या है? और कुबेर, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ का पूजन क्यों होता है?

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दीपावली पूजा दार्शनिक दृष्टिकोण

हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन दीपावली का पावन पर्व मनाया जाता है। दिवाली के इस पवित्र दिन पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं दिवाली के शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

दिवाली के दिन घर में शुभ लाभ क्यों लिखते हैं? आज इस लेख के माध्यम से हम आपको माता लक्ष्मी और गणेश के पूजन का महत्व समझाने वाले है।

दरअसल माता लक्ष्मी धन संपदा की देवी है। इस संसार में जितने भी भौतिक सुख हैं और जितनी भी संपत्ति है वह सब माता लक्ष्मी के अधीन है। लेकिन भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के स्वामी है।

अब आप कल्पना कीजिए कि किसी व्यक्ति को धन संपदा तो प्राप्त हो जाए लेकिन उसके पास बुद्धि ना हो और विवेक ना हो तो वह उस धन को प्राप्त करके क्या करेगा? वह अहंकारी और अभिमानी हो जाएगा। उसे यह ज्ञात ही नहीं रहेगा की धन का प्रयोग उसे किस प्रकार करना है।

मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी यानी की माता लक्ष्मी के साथ में जल तत्व जुड़ा है। अगर हम जल की ओर देखे तो जल सदैव गतिमान रहता है। वह कभी भी एक जगह रुकता नहीं और अगर वह रुकता है तो रोग और बीमारी का कारण बन जाता है।

ठीक उसी प्रकार माता लक्ष्मी का स्वभाव है। माता लक्ष्मी कभी भी एक स्थान पर रूकती नहीं है। मां लक्ष्मी को बनाए रखने के लिए , धन संपदा को संभालने के लिए बुद्धि और विवेक की आवश्यकता पड़ती ही है।

कोई भी मनुष्य अपनी को कुबुद्धि के बल पर माता लक्ष्मी को अधिक समय तक अपने घर में नहीं रख सकता इसलिए उसे बुद्धि चाहिए। जब तक आपके पास निर्णय लेने की क्षमता नहीं होगी , जब तक आपके पास विनम्रता का भाव नहीं होगा ,आप माता लक्ष्मी को संभाल नहीं सकते।

अगर माता लक्ष्मी उस व्यक्ति के घर में आ भी जाएगी तो एक समय के बाद उसे छोड़कर चली जाएगी। इसलिए दिवाली के पूजन में माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा भी करनी चाहिए ताकि लक्ष्मी के साथ आपको बुद्धि और विवेक भी प्राप्त हो।

माता लक्ष्मी के साथ हमेशा भगवान गणेश की पूजा इसी भावना से करें कि हे भगवान गणेश ! आप हमें सद्बुद्धि प्रदान कीजिए। अब बात करते हैं कुबेर की। माता लक्ष्मी ने दरअसल धन संपदा की देख-रेख और सुरक्षा के लिए भगवान कुबेर को नियुक्त किया है।

भगवान कुबेर का निवास अलकापुरी में है जो कि भगवान शंकर के कैलाश पर्वत के निकट ही है। भगवान शंकर, कुबेर को अपना मित्र मानते हैं इसलिए माता लक्ष्मी ने उन्हें ही धन का देवता बनाया।

किसको कितना धन देना है और कब देना है यह सब भगवान कुबेर की ही जिम्मेदारी है। इसलिए दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ-साथ कुबेर देवता का पूजन भी करना चाहिए।

इसी के साथ रिद्धि सिद्धि और शुभ लाभ का भी पूजन करना चाहिए क्योंकि यह भगवान गणेश के कुटुंब का हिस्सा है। जब तक आप इन सब का आशीर्वाद नहीं लेंगे आप अपने धन संपत्ति का सही तौर पर इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

इस कलयुग में धन संपत्ति पाना बहुत आसान है लेकिन उस धन संपत्ति को पाकर अभिमानी ना होना, अहंकारी ना होना यह बहुत बड़ी बात है।

इसलिए इस दिवाली पर जब आप भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें तो उनसे यही प्रार्थना करें कि हमें ऐसी सद्बुद्धि प्रदान करें कि हमारे जीवन में कभी भी अहंकार का भाव नहीं आए। हम सब के साथ समान रूप से व्यवहार करें। कभी किसी के साथ भेदभाव ना करें और अपने जीवन में स्थाई संपत्ति को प्राप्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

माता लक्ष्मी धन संपदा की देवी हैं और भगवान गणेश बुद्धि तथा विवेक के स्वामी हैं। इसलिए धन के साथ बुद्धि और विवेक प्राप्त करने के लिए दोनों की पूजा की जाती है।

माता लक्ष्मी के साथ बुद्धि और विवेक की आवश्यकता क्यों है?

धन संपदा को सही तरीके से संभालने और उसका उचित प्रयोग करने के लिए निर्णय लेने की क्षमता, बुद्धि, विवेक और विनम्रता आवश्यक है।

दिवाली पर कुबेर देवता का पूजन क्यों करना चाहिए?

कुबेर धन संपदा की देख-रेख और सुरक्षा से जुड़े हैं। किसको कितना धन देना है और कब देना है, यह उनकी जिम्मेदारी बताई गई है।

दिवाली पर रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का पूजन क्यों किया जाता है?

रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ भगवान गणेश के कुटुंब का हिस्सा हैं। इसलिए दिवाली के पूजन में इनका भी आशीर्वाद लेने की बात कही गई है।

दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश से क्या प्रार्थना करनी चाहिए?

ऐसी सद्बुद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए जिससे जीवन में अहंकार न आए, सभी के साथ समान व्यवहार हो, किसी के साथ भेदभाव न हो और स्थाई संपत्ति प्राप्त हो।

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