भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इसी दिन गणपति बप्पा के जन्मोत्सव के रूप में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को पड़ रही है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी।
गणेश जी की मूर्ति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के कारण मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए जयपुर में गणपति पूजा का मध्याह्न मुहूर्त लगभग 11:08 बजे से 1:36 बजे तक रहने वाला है।
गणेश स्थापना से पहले ऐसे करें पूजा की तैयारी-
गणपति स्थापना के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। चौकी पर अक्षत यानी चावल की ढेरी बनाकर उसके ऊपर मिट्टी से बनी स्वहस्त निर्मित या पर्यावरण के अनुकूल गणेश प्रतिमा स्थापित की जा सकती है।
इसके बाद बप्पा के दाहिनी ओर तांबे या पीतल का कलश रखें। कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। उसके ऊपर आम के पत्ते लगाकर लाल वस्त्र में लिपटा नारियल रखें।
मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी का आह्वान करें और पुष्प व अक्षत अर्पित करें। प्रतिमा पर गंगाजल या शुद्ध जल के छींटे दें। यदि प्रतिमा धातु की है तो पंचामृत से स्नान कराया जा सकता है। इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत, पीला वस्त्र, सिंदूर और जनेऊ अर्पित करें।
गणेश जी की पूजा में 21 दूर्वा और शमी पत्र अर्पित करना विशेष माना जाता है। वहीं गणपति पूजन में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा नहीं है।
पूजन सामग्री में गणेश प्रतिमा, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, आम के पत्ते, नारियल, रोली, चंदन, सिंदूर, जनेऊ, दूर्वा, शमी पत्र, फूल, धूप, दीप, मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा जैसी सामग्री पहले से तैयार रखनी चाहिए।
जानें स्थापना का शुभ समय, भोग और जरूरी नियम-
गणेश जी की स्थापना और मुख्य पूजा मध्याह्न काल में करना शुभ माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म इसी समय हुआ था। अलग-अलग शहरों के पंचांग में समय अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर के अनुसार अंतिम मुहूर्त देखकर पूजा करनी चाहिए।
पूजा के दौरान बप्पा को 21 मोदक या बेसन के लड्डू, केला, ऋतुफल और पंचमेवा का भोग लगाया जा सकता है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर गणेश चतुर्थी की कथा सुनें और श्रद्धापूर्वक आरती करें।
इस दिन एक खास बात का ध्यान रखना भी जरूरी है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन से बचने की धार्मिक मान्यता है। 14 सितंबर को सुबह 09:10 बजे से रात 08:37 बजे तक चंद्र दर्शन से बचें।
गणेशोत्सव के दिनों में घर का वातावरण सात्विक रखने का प्रयास करें। भक्त इस दौरान पूजा-पाठ, भजन और सेवा जैसे धार्मिक कार्यों पर विशेष ध्यान दे तो गणेश जी की कृपा अवश्य मिलती है। भोजन में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल न करने की परंपरा भी कई परिवारों में अपनाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-गणेश चतुर्थी 2026 कब मनाई जाएगी?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।
2-गणेश जी की स्थापना किस समय करनी चाहिए?
गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को शुभ माना जाता है। सटीक समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित है।
3-गणेश जी की पूजा में क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?
गणेश जी को दूर्वा, शमी पत्र, फूल, सिंदूर, चंदन, अक्षत, मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा अर्पित किए जा सकते हैं।
4-क्या गणेश जी को तुलसी चढ़ाई जाती है?
गणेश पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा नहीं है। पूजा के दौरान दूर्वा और शमी पत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
5-गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को क्यों नहीं देखना चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लग सकता है, इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।