एक बार श्री विष्णु ने ब्रह्मा जी को बेहद उदास देखा और उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा। ब्रह्मा ने विष्णु को बताया कि वो सृष्टि की वृद्धि करना चाहते है लेकिन उन्हें कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। उन्होंने विष्णु को बताया कि कैसे नारद ने भी उनकी बात को अनसुना करके भक्ति का मार्ग अपना लिया। ब्रह्मा जी की यह बात सुनकर श्री विष्णु ने उनसे शिव के पास जाने को कहा।
ब्रह्मा जी ने विष्णु से कहा कि वो शिव के ध्यान को एक बार फिर भंग नहीं कर सकते है। दक्ष के यज्ञ में हुआ विध्वंस ब्रह्मा जी को याद था लेकिन फिर भी श्री विष्णु के कहने पर उन्होंने शिव का ध्यान करना शुरू किया।
काफी समय बीत जाने के बाद शिव ने अपनी आँख खोली और अपने सामने ब्रह्मा जी को पाया। दोनों ने एक दूसरे का अभिवादन किया और ब्रह्मा ने अपने आने का प्रयोजन शिव से कहा। शिव ने जब ब्रह्मा जी को परेशान देखा तो उन्होंने उनकी समस्या का समाधान करने का निर्णय लिया। इसके बाद ब्रह्मा ने देखा कि शिव के शरीर में कुछ बदलाव हो रहे है और देखते ही देखते उनका आधा शरीर पुरुष और आधा शरीर नारी का हो गया।
शिव के आधे शरीर का हिस्सा आदि शक्ति ने ग्रहण कर लिया था। ऊपर से लेकर नीचे तक दोनों एक भी थे और एक दूसरे से विपरीत भी थे।
शिव के उसी स्वरुप को उभयलिंगी यानी अर्ध नारीश्वर का रूप कहा गया। आदि शक्ति ने ब्रह्मा से कहा कि जब तक पुरुष और नारी एक नहीं होंगे आपकी सृष्टि वृद्धि नहीं कर सकती है। पुरुष और नारी एक दूसरे से भिन्न होने के बाद भी एक दूसरे से पूरक होंगे और ऐसा कहकर आदि शक्ति ने ब्रह्मा को प्रजनन शक्ति प्रदान की। ब्रह्मा जी की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था।
उन्होंने शिव के उस स्वरुप की पूजा की और एक बार फिर ध्यान में बैठ गए। प्रजनन शक्ति को प्राप्त कर ब्रह्मा ने सबसे पहले एक पुरुष को पैदा किया जिसका नाम मनु था। उनकी स्त्री संतान का नाम ब्राह्मी हुआ। मैथुन को आधार बनाने के कारण यह सृष्टि मैथुनी सृष्टि कहलायी। मनु चूंकि इस ब्रह्माण्ड के पहले पुरुष थे इसलिए सभी जीवात्माओं को मनुष्य या मानव कहा गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-ब्राह्मी कौन थीं?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने प्रजनन शक्ति प्राप्त करने के बाद सबसे पहले मनु नामक पुरुष को उत्पन्न किया। उनकी स्त्री संतान का नाम ब्राह्मी बताया गया है।
2-ब्रह्मा जी को प्रजनन शक्ति किसने प्रदान की?
आदि शक्ति ने अर्धनारीश्वर रूप में प्रकट होकर ब्रह्मा जी को प्रजनन शक्ति प्रदान की और बताया कि पुरुष और नारी एक-दूसरे के पूरक हैं।
3-शिव ने अर्धनारीश्वर रूप क्यों धारण किया था?
ब्रह्मा जी सृष्टि की वृद्धि को लेकर चिंतित थे। उनकी समस्या का समाधान करने के लिए शिव ने अपने आधे शरीर में आदि शक्ति को धारण कर अर्धनारीश्वर रूप प्रकट किया।
4-अर्धनारीश्वर रूप का क्या अर्थ है?
अर्धनारीश्वर रूप में शिव का आधा शरीर पुरुष और आधा नारी स्वरूप का प्रतीक है। यह पुरुष और नारी की एकता तथा परस्पर पूरकता को दर्शाता है।
5-मैथुनी सृष्टि किसे कहा गया?
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रजनन शक्ति प्राप्त करने के बाद ब्रह्मा जी ने मनु और ब्राह्मी को उत्पन्न किया। पुरुष और नारी को आधार बनाकर आगे बढ़ने वाली सृष्टि को मैथुनी सृष्टि कहा गया।











