श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों और संसार में व्याप्त अपने स्वरूप का वर्णन करते हैं।
श्रीकृष्ण बताते हैं कि संसार की सभी श्रेष्ठ, तेजस्वी और सामर्थ्यवान वस्तुएँ उनकी ही दिव्य शक्ति का अंश हैं। वे अपनी प्रमुख विभूतियाँ बताते हैं।

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