श्रीकृष्ण मनुष्य की श्रद्धा और उसके तीन प्रकारों का स्वरूप समझाते हैं।
श्रीकृष्ण सात्त्विक, राजसिक और तामसिक श्रद्धा, आहार, यज्ञ, तप और दान का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि जैसी श्रद्धा होती है, वैसा ही मनुष्य बनता है।

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श्रीकृष्ण सात्त्विक, राजसिक और तामसिक श्रद्धा, आहार, यज्ञ, तप और दान का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि जैसी श्रद्धा होती है, वैसा ही मनुष्य बनता है।

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