शुकदेव जी राजा परीक्षित को भगवान के विराट स्वरूप और भक्ति का ज्ञान देते हैं।
द्वितीय स्कंध में शुकदेव जी भगवान के विराट स्वरूप, सृष्टि की रचना और ध्यान का मार्ग बताते हैं। वे परीक्षित को भक्ति, योग और परमात्मा के चिंतन का उपदेश देते हैं।

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